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WHO ने स्वाइन फ्लू के बाद 2022 में घोषित किया ग्लोबल हेल्थ एमरजैंसी। आखिरकार इसका मतलब क्या है।

 

Image Credit : Fahroni/Shutterstock

देश की राजधानी दिल्ली सहित अन्य इलाकों में भी कोविड-19 के केस के साथ-साथ मंकीपॉक्स से जुड़े चार नए केस सामने आए हैं। केरल से 3 और देश की राजधानी दिल्ली से एक नया केस सामने आया है। वेस्ट दिल्ली से एक केस सामने आया है जिसके मुताबिक 31 वर्ष के आदमी के अंदर मंकीपॉक्स के लक्षण पाए गए हैं। मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज में मरीज को भर्ती करवाया गया है। बुखार और त्वचा पर दाग होने के बाद अस्पताल में भर्ती करवाया गया। लेकिन मरीज की कोई भी ट्रैवल हिस्ट्री सामने नहीं आई है। भारत में मंकीपॉक्स का पहला मरीज कोल्लम में 12 जुलाई को पाया गया था।

संक्रमित शख्स के बारे में बताया जा रहा है कि यह यूएई से आया था। दूसरा केस अगले दिन कन्नूर से सामने आया था। यहां पर दुबई से आया शख्स बीमारी से पीड़ित मिला था। पूरी दुनिया के आंकड़ों के बारे में बात करे तो लगभग 17000 मामले सामने आ चुके हैं।

अफ्रीका में मंकीपॉक्स से पांच लोगों की मौत हो चुकी है। मंकीपॉक्स के लगातार बढ़ते हुए आंकड़ों को देखते हुए WHO ने इसे ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी घोषित किया है। आखिरकार इस बीमारी के लक्षण, इलाज और बचने का तरीका क्या है इसके बारे में बात कर लेते हैं।

इसके अलावा आपको बताने वाले हैं कि क्यों मंकीपॉक्स कोविड-19  के मुकाबले इतना ज्यादा खतरनाक नहीं है। शनिवार को डब्ल्यूएचओ द्वारा मंकीपॉक्स पर ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी घोषित की गई है। डब्ल्यूएचओ के प्रमुख टेड्रोस अधनोम घेब्रेसियस का कहना है कि 70 से ज्यादा देशों में इस वायरल इंफेक्शन का प्रसार काफी ज्यादा असाधारण स्थिति में जताया जा रहा है। पहली बार ऐसा देखने को मिल रहा है कि किसी बीमारी को लेकर इमरजेंसी घोषित की गई है। यह एक ऐसी बीमारी है जो कि दुनिया में अलग अलग तरीके से फैल रही है।

इस बात को देखते हुए तय किया गया है कि मंकीपॉक्स पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी है। डब्ल्यूएचओ द्वारा मंकीपॉक्स पर सबसे ज्यादा टॉप लेवल अलर्ट जारी किया गया है। भविष्य में जाकर मंकीपॉक्स एक खतरनाक बीमारी बन सकता है और इसको महामारी में बदलने से पहले अंतरराष्ट्रीय पहल की जरूरत है। WHO की यह घोषणा दुनियाभर की सभी सरकारों के लिए तुरंत कार्यवाही की अपील का काम करती हैं। मंकीपॉक्स पर डब्ल्यूएचओ के चीफ ने कहा कि दुनियाभर और अन्य क्षेत्रों में मंकीपॉक्स के लक्षण काफी कम दिखाई दे रहे हैं लेकिन यूरोप में इसका खतरा काफी ज्यादा है।

डब्ल्यूएचओ ने पिछले दो दशक में 7 ग्लोबल इमरजेंसी घोषित की है। 2009 में स्वाइन फ्लू, 2014 में पोलियो और इबोला, 2015 में जीका, 2018 में के.इबोला और 2019 में करोना वायरस को ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी घोषित किया गया था। एक रिपोर्ट के अनुसार सारी हेल्थ इमरजेंसी महामारी नहीं बनती है लेकिन फिर भी सतर्क रहना जरूरी होता है। बताया जा रहा है कि मंकीपॉक्स का फैलना इतना आसान नहीं है। यह कोई नया वायरस नहीं है और इसकी वैक्सीन उपलब्ध है। फीवर, गले में खराश और सास में दिक्कत होना मंकीपॉक्स के लक्षण होते हैं। 

मंकीपॉक्स में चिकन पॉक्स की तरह रैशेज और छोटे दाने निकल आते हैं। पूरे शरीर में दाने दिखाई देने लगते हैं। स्मॉल पॉक्स और चिकन पॉक्स में रैशेज पूरे शरीर में हो जाते हैं लेकिन तलवे और हाथों में नहीं बनते हैं। लेकिन मंकीपॉक्स में तलवे और हाथों में रैशेज बन जाते हैं। स्मॉल पॉक्स के दौरान इस्तेमाल होने वाली वैक्सीन यहां पर काम आ सकती है लेकिन अभी तक यह वैक्सीन अमेरिका और रूस में ही उपलब्ध है। मंकीपॉक्स जानवरों से इंसानों में ट्रांसफर हो सकता है और फिर इंसानों से इंसानों में फैल सकता है। यहाँ पर आपको 2 तरह के स्ट्रेन देखने को मिलते हैं। पहला वेस्ट अफ्रीका का और दूसरा सेंट्रल अफ्रीका का।

यहां पर सेंट्रल अफ्रीका का स्ट्रेन काफी ज्यादा खतरनाक होता है। जानवरों के स्टूल और यूरिन के संक्रमण में आने से फैल सकते हैं। इसके अलावा हवा में भी फैल सकता है। कई बार सांस से जुड़ी तकलीफ भी होती है जिसकी वजह से निमोनिया भी हो सकता है। कई बार ब्रेन से संबंधित परेशानियों भी हो सकती हैं। अमेरिका में पहली बार मंकीपॉक्स बच्चों में देखने को मिला है। CDC द्वारा बताया गया है कि इनमे से एक बच्चा कैलिफोर्निया का है। डॉक्टरों का कहना है कि दोनों बच्चे स्थिर हैं और उनकी हालत में सुधार देखने को मिल रहा है। अमेरिका में अब तक 2,900 मामले देखने को मिले हैं।

Updated: July 25, 2022 — 1:56 pm

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