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गांव और शहर में माता पिता द्वारा बच्चों को कैसे पाला जाता है



नमस्कार दोस्तों आज की जानकारी में आप सभी को बताने वाले हैं कि गांव के और शहर के माता पिता अपने बच्चों के प्रति किस प्रकार ध्यान रखते हैं। सबसे पहले हम शहर के बच्चों के बारे में बात कर लेते हैं तो उनके माता-पिता काफी ज्याद जिम्मेदार होते हैं। शहर के माता पिता बच्चों के प्रति कैसे जिम्मेदार होते हैं सबसे पहले इसके बारे में जान लेते हैं। जैसे ही स्कूल से बच्चा घर आता है तो सबसे पहले उसके मां-बाप बोलते हैं कि कपड़े बदल लो। इसके बाद बच्चे को खाना दिया जाता है और फिर उनसे पूछा जाता है कि आज स्कूल में आपको क्या क्या पढ़ाया गया है।


इसके बाद बच्चे से सभी सवाल जवाब पूछे जाते हैं कि आखिरकार स्कूल में क्या क्या सिखाया जाता है और स्कूल से जो भी होमवर्क मिला होता है उसके बाद बच्चे को होमवर्क कराया जाता है। शहर के जो माता-पिता है उनकी बच्चों के प्रति  कुछ इस प्रकार जिम्मेदारी होती है। अगर हम गांव के बच्चों की बात करे तो गांव में ऐसे बहुत ही कम बच्चे देखने को मिलते हैं जो कि सरकारी नौकरी करते हैं। अगर हम शहर के बारे में बात करे तो शहर के एक ही घर में दो दो तीन तीन बच्चे ऐसे मिल जाएंगे जो कि सरकारी नौकरी करते होंगे।


गांव और शहर में प्रमुख रूप से यही अंतर देखा जाता है।  शहर में स्कूल के बच्चों के बारे में अगर बात करें तो शहर में मां बाप बच्चों के स्कूल में जाकर महीने में एक बार जरूर पूछते हैं कि बच्चा पढ़ाई कैसे कर रहा है। अगर हम गांव के बच्चे के बारे में बात करें तो गांव का बच्चा घर पर आकर कपड़े भी अपने मर्जी के पहनता है और खाना भी अपनी मर्जी का खाता है।


गांव में माता पिता के तरफ से बच्चे को कोई भी सपोर्ट नहीं मिलता है। गांव में बच्चा स्कूल में क्या पढ़ कर आया है इसके बारे में कुछ पूछा नहीं जाता है। बच्चे ने होमवर्क किया है या फिर नहीं किया है इसके बारे में भी नहीं पूछा जाता है। अगर गांव के बच्चे को स्कूल से होमवर्क भी मिलता है और वह घर में आकर किताबे खोल कर बैठता है तो। ऐसे में गांव के मां बाप बोलते हैं कि स्कूल में पढ़ाई कर ली थी अब घर में थोड़ा सा किताबें बंद करके काम में हाथ में बटोर लो।


गांव के बच्चे से घर में नहीं पूछा जाता है की स्कूल में क्या कुछ पढ़ाया गया है। इसके अलावा यह भी नहीं पूछा जाता है कि स्कूल से क्या कुछ होमवर्क मिला है। गांव के बच्चे के ऊपर इन सभी बातों का बुरा असर पड़ता है। अगर हम शहर के बच्चों के बारे में बात करें तो उन्हें गेम खेलने का बड़ा शौक होता है। किसी बच्चे को क्रिकेट खेलना पसंद होता है, कैसी को टेनिस खेलना पसंद है और किसी को फुटबॉल खेलना पसंद है। शहर में बच्चों से पूछा जाता है कि उन्हें क्या चीज खेलना पसंद है।


अगर बच्चे को क्रिकेट खेलना पसंद है तो मां-बाप की तरफ से काफी ज्याद सपोर्ट दिया जाता है। लेकिन गांव में ऐसा कुछ नहीं होता है और बच्चों से नहीं पूछा जाता है कि उन्हें क्या चीज पसंद है। शायद यही वजह है कि गांव का बच्चा आगे नहीं बढ़ पाता है।

Updated: August 2, 2022 — 8:00 am

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